कर्नाटक विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सात में से पांच सीटों पर जीत दर्ज की है। चुनाव परिणामों ने राज्य की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि बीजेपी और जेडीएस के कई विधायकों द्वारा कथित क्रॉस-वोटिंग किए जाने की बात सामने आई है। राजनीतिक गलियारों में इसे कांग्रेस का ‘रिवर्स ऑपरेशन लोटस’ बताया जा रहा है। चुनाव में कांग्रेस ने पांच उम्मीदवार उतारे थे और सभी जीतने में सफल रहे। कांग्रेस उम्मीदवार टिप्पन्नाप्पा कामाकानूर, पी.वी. मोहन, बी.के. हरिप्रसाद, बी.एस. शिवन्ना और विनय कार्तिक प्रकाश विधान परिषद पहुंच गए। वहीं बीजेपी के रघु आर और लिंगराज पाटिल ने जीत हासिल की, जबकि जेडीएस के उम्मीदवार गोविंदराजू को हार का सामना करना पड़ा। रिपोर्टों के अनुसार बीजेपी के तीन और जेडीएस के आठ विधायकों ने कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया। कांग्रेस को कुल 151 वोट मिले, जो उसके अनुमानित समर्थन से 11 वोट अधिक थे। जेडीएस उम्मीदवार को केवल 14 वोट मिले, जबकि उनकी पार्टी के पास विधानसभा में 18 विधायक हैं। 224 सदस्यीय विधानसभा में वर्तमान संख्या 222 है। कांग्रेस के पास 135 विधायक हैं और उसे कुछ निर्दलीय तथा अन्य सदस्यों का भी समर्थन प्राप्त है। परिणामस्वरूप विधान परिषद में कांग्रेस की संख्या बढ़कर 39 हो जाएगी, जबकि बीजेपी 28 और जेडीएस 6 सदस्यों तक सिमट जाएगी। उपमुख्यमंत्री D. K. Shivakumar ने इसे सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों पर विधायकों के भरोसे का परिणाम बताया। वहीं बीजेपी नेताओं ने क्रॉस-वोटिंग करने वाले विधायकों की पहचान कर कार्रवाई करने की बात कही है। चुनाव परिणामों ने राज्य में कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति को और मजबूत कर दिया है।
