नई दिल्ली,। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की ओर अग्रसर देश के इस स्वप्न को साकार करने में सिविल सेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। यह बात कहते हुए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने अमृतकाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान का स्मरण दिलाया। उन्होंने कहा कि यह विकास समावेशी और अंतिम छोर तक सेवा पहुंचाने पर केंद्रित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवा अधिकारियों की ऊर्जा और नवोन्मेषी विचार राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने अधिकारियों से ‘सेवा भाव और कर्तव्य बोध’ को मार्गदर्शक मंत्र के रूप में अपनाने का आह्वान किया। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन सोमवार को भारतीय रक्षा लेखा सेवा (आईडीएएस) के 2023 और 2024 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। उपराष्ट्रपति ने उनका स्वागत करते हुए कहा कि रक्षा लेखा विभाग की 275 वर्षों से अधिक की समृद्ध विरासत है और यह सरकार के सबसे पुराने विभागों में से एक है। भारतीय रक्षा लेखा सेवा के महत्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह सेवा भारतीय सशस्त्र बलों और संबद्ध संगठनों के वित्तीय संसाधन प्रबंधन में अहम भूमिका निभाती है।
