दिव्य रणभूमि राजनितिक डैस्क
लुधियाना। पंजाब की राजनीति में इन दिनों बयानबाज़ी का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा सुखबीर सिंह बादल पर लगातार किए जा रहे तीखे हमलों ने सियासी माहौल को गरमा दिया है। राजनीतिक पंडित इसे केवल बयानबाज़ी नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति के रूप में देख रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि जब सत्ता पक्ष किसी एक नेता या राजनितिक पार्टी को बार-बार निशाना बनाता है, तो वह उसे भविष्य के मुख्य प्रतिद्वंदी के रूप में स्थापित करने का संकेत होता है। आम आदमी पार्टी पंजाब की राजनीति इस समय दो स्तरों पर काम करती दिखाई दे रही है। पहला, अकाली दल को सीधे मुकाबले में लाकर यह संदेश देना कि असली राजनीतिक लड़ाई उसी से है । दूसरा, कांग्रेस के पारंपरिक विपक्षी स्पेस को सीमित करना, ताकि राजनीतिक मुकाबला धीरे-धीरे आप बनाम अकाली दल बन जाए। या फिर आप के रणनितिकारो की सोची समझी साजिश के तहत इस राजनीति फ्रेमिंग के माध्यम से कांग्रेस के पारंपरिक विपक्षी दल के दावों को सीमित करने की कोशिश भी कहा जा सकता है। झाड़ू वालों की यह रणनीति आने वाले चुनावों को ध्यान में रखकर तैयार की गई मानी जा रही है। अकाली दल के लिए यह स्थिति एक अवसर के रूप में भी देखी जा रही है। लगातार हमलों से जनता के बीच यह धारणा बन सकती है कि अकाली दल ही सरकार के लिए असली चुनौती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अकाली दल की राजनीतिक पुनर्सक्रियता को बल मिल सकता है। आने वाले समय में यह टकराव पंजाब की राजनीति में नए समीकरण और ध्रुवीकरण को जन्म दे सकता है।
