दिव्य रणभूमि ब्यूरो
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने महिलाओं को 33 प्रतिशत राजनीतिक आरक्षण का लाभ दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है।
इस स्तर में नारी शक्ति वंदन कानून को लागू करने के लिए चर्चा होगी। प्रधानमंत्री ने इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं को उनका अधिकार सुनिश्चित करना है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह वही सरकार है जिसने लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने कहा कि इस कानून को प्रभावी बनाने के लिए जरूरी संशोधन किए जाएंगे और इसी उद्देश्य से विशेष सत्र आयोजित किया जा रहा है। विशेष सत्र के एजेंडे में परिसीमन और सीटों की संख्या से जुड़ा मुद्दा भी अहम रहेगा। दक्षिण भारत के राज्यों—केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, गोवा और तेलंगाना में सीटें घटने की आशंकाओं को खारिज करते हुए प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि किसी भी राज्य की मौजूदा सीटें कम नहीं होंगी। महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें अतिरिक्त रूप से जोड़ी जाएंगी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार इस विषय पर व्यापक सहमति चाहती है और इसके लिए कांग्रेस समेत इंडिया गठबंधन के सभी दलों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया गया है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे राजनीति से ऊपर उठकर महिलाओं के हित में इस कानून का समर्थन करें। प्रधानमंत्री के अनुसार, माताओं-बहनों का यह हक पिछले 40 साल से लंबित है, जिसे अब और टालना उचित नहीं है।” इस विशेष सत्र का मुख्य आकर्षण ‘नारी शक्ति वंदन कानून’ में प्रस्तावित संशोधन होगा। सरकार का उद्देश्य 2029 के चुनावों में महिला जनप्रतिनिधियों की संख्या में ऐतिहासिक बढ़ोतरी सुनिश्चित करना है, ताकि देश की आधी आबादी को उनका अधिकार मिल सके।
