मोहाली/मोगा । राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने पंजाब के मोगा में सरकारी इमारत पर खालिस्तानी झंडा फहराने के मामले में दो आरोपियों को साढ़े पांच साल की कैद और जुर्माने की सजा सुनाई है। जांच एजेंसी के अनुसार दोनों ने यह कार्रवाई प्रतिबंधित संगठन “सिख्स फॉर जस्टिस” के जनरल काउंसिल और घोषित आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू के उकसावे पर की थी। मोहाली स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने दोषियों की पहचान इंद्रजीत सिंह और जसपाल सिंह, निवासी मोगा, के रूप में की है। अदालत ने दोनों को साढ़े पांच साल की सजा सुनाने के साथ-साथ 16-16 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। एनआईए ने इस मामले में गिरफ्तार किए गए दो अन्य आरोपियों के अलावा अमेरिका में रह रहे गुरपतवंत सिंह पन्नू और उसके सहयोगी राणा सिंह उर्फ हरप्रीत सिंह के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल की थी। वर्ष 2021 में मोहाली की विशेष अदालत ने पन्नू और हरप्रीत सिंह को इस मामले में भगोड़ा अपराधी घोषित कर दिया था। यह मामला वर्ष 2020 की उस घटना से जुड़ा है, जब स्वतंत्रता दिवस समारोह से एक दिन पहले 14 अगस्त को आरोपियों ने मोगा स्थित डिप्टी कमिश्नर कार्यालय पर खालिस्तानी झंडा फहरा दिया था। जांच एजेंसी के मुताबिक दोनों आरोपी प्रशासनिक परिसर में घुस गए और इमारत की छत पर चढ़कर ‘खालिस्तान’ लिखे केसरिया-पीले रंग के झंडे को फहरा दिया। एनआईए के अनुसार आरोपियों ने भारतीय तिरंगे की रस्सी काटकर उसका अपमान भी किया, जिससे राष्ट्रीय ध्वज जमीन पर गिर गया। इसके बाद आरोपियों ने तिरंगे को रस्सी से घसीटा था।
