सामूहिक दुष्कर्म के आरोपों से बरी हुए आसाराम, लेकिन जेल जाना तय
जोधपुर : राजस्थान हाई कोर्ट ने स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम को एक मामले में आंशिक राहत देते हुए सामूहिक दुष्कर्म और बच्चे के सामूहिक यौन उत्पीड़न के आरोपों से बरी कर दिया है, लेकिन नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। अदालत के इस फैसले के बाद आसाराम को आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया गया है। वह फिलहाल अस्थायी जमानत पर बाहर चल रहा है। राजस्थान हाई कोर्ट की खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति अरुण मोंगा और न्यायमूर्ति योगेंद्र कुमार पुरोहित शामिल थे, ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376(डी), 120(बी) तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 5(जी)/6 के तहत आसाराम को राहत दी। हालांकि अदालत ने आईपीसी की धारा 376(2)(एफ) के तहत नाबालिग से दुष्कर्म के अपराध में दी गई उम्रकैद की सजा को यथावत रखा। अदालत ने इसके साथ ही धारा 342 (बंधक बनाना), 370(4) (मानव तस्करी), 506 (आपराधिक धमकी), 509 (महिला की मर्यादा भंग करना) और 354(ए) (यौन उत्पीड़न) समेत कई अन्य धाराओं के तहत दोषसिद्धि को भी कायम रखा। पॉक्सो एक्ट की धारा 7/8 और किशोर न्याय अधिनियम की धारा 23 के तहत भी सजा बरकरार रखी गई। मामले में सह-आरोपी संचिता गुप्ता उर्फ शिल्पी और शरत चंद्र को अदालत ने सभी आरोपों से बरी कर दिया। उल्लेखनीय है कि आसाराम को वर्ष 2018 में जोधपुर स्थित आश्रम में नाबालिग छात्रा के यौन उत्पीड़न मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।