चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा गर्भपात के लिए पति की सहमति जरूरी नहीं है। न ही कानून में ऐसा कोई प्रावधान है। मां बनने या न बनने का फैसला महिला का निजी और संवैधानिक अधिकार है। जस्टिस सुवीर सहगल की बेंच ने यह फैसला फतेहगढ़ साहिब की रहने वाली 21 वर्षीय विवाहित महिला की याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए सुनाया। पति के साथ रिश्ते में दरारों के चलते याचिका के माध्यम से महिला ने अदालत से गुहार लगाई थी कि उसे 16 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने की इजाज्त दी जाए। याचिका की सुनवाई करते हुए माननीय अदालत ने मैडिकल बोर्ड का गठन कर गर्भ की जांच के लिए रिपोर्ट मांगी थी। मैडिकल बोर्ड की जांच के बाद गर्भपात के लिए महिला के फिट होने के बाद हाईकोर्ट के बैंच ने आदेश दिए कि महिला चंडीगढ़ के किसी अस्पताल में सुरक्षित गर्भपात करा सकती है।